Indu kumari

Add To collaction

जीवन में अब यूं नहीं हमें सुस्ताना है,

जीवन में अब यूं नहीं हमें सुस्ताना है,
धीरे-धीरे ही सही से कदम बढ़ाना है।
आलस रूपी शत्रु को मार भगाना है,
जोश जुनून को रा हों में बिछाना है।
सफलता तो अब मिलकर ही रहेगी,
अपने रुके हुए कदम को बढ़ाना है।

डॉ. इन्दु कुमारी 
   मधेपुरा बिहार

   12
4 Comments

Varsha_Upadhyay

30-May-2023 11:36 PM

बहुत खूब

Reply

Babita patel

30-May-2023 06:33 PM

fantastic poem

Reply

Abhinav ji

30-May-2023 08:35 AM

Very nice 👍

Reply