जीवन में अब यूं नहीं हमें सुस्ताना है,
जीवन में अब यूं नहीं हमें सुस्ताना है,
धीरे-धीरे ही सही से कदम बढ़ाना है।
आलस रूपी शत्रु को मार भगाना है,
जोश जुनून को रा हों में बिछाना है।
सफलता तो अब मिलकर ही रहेगी,
अपने रुके हुए कदम को बढ़ाना है।
डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार
Varsha_Upadhyay
30-May-2023 11:36 PM
बहुत खूब
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Babita patel
30-May-2023 06:33 PM
fantastic poem
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Abhinav ji
30-May-2023 08:35 AM
Very nice 👍
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